कशिश – “Kashish” Ghazal Program in Bay Area, CA


बे एरिया के जानेमाने आज़माये हुए कलाकार डिम्पल भाई पटेल ने “कशिश” नाम से ग़ज़ल प्रोग्राम प्रस्तुत किया जिसमे प्रस्तावना और कार्यक्रम की उद्धघोषणा कि  मशहूर शायरा/ कवयित्री अर्चना पांडा ने.  अगर आप ये कार्यक्रम चूक गए तो आशा है के ये समीक्षा पढ़कर अगले कार्यक्रम में जरूर आयेँगे. (You can read information on the writer below).DSC_0014 (2)

अर्चनाजी ने ये कविता सुनाकर  कार्यक्रम की शुरुआत की  “में बोली क्या लिखू बताओ, वो बोला आकाश लिखो, खुद को मत बांधो सीमा में, जो होता है आकाश लिखो” और फिर कलाकरोने बरसाई आकाश से ग़ज़ालोकी बारिश.  प्रेक्षकोंके होश उड़ गए जब डिंपलभाई ने गाया “होशवालोको खबर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है”. कीबोर्ड पर उनको साथ दिया आलाप देसाई ने और तमल डे ने गिटार पर.  तबला पर पिता और बेटे, गुरदीप सिंह हीरा और संत प्रीत हीरा ने दिल जीत लिया.  लेकिन ये तो सिर्फ थी शुऱुआत.DSC_0023 (3)

बे एरिया की प्यारी गायिका उर्मि जोशी का परिचय तो उनकी आवाज में है, यह ध्यान में रखते हुए अर्चनाजी ने उनका परिचय करते वख्त कहा “खूबसूरती को सँवरने की जरुरत क्या है, खुद सादगी भी तो क़यामत का आभास है” हाय………. हो गया दिल घायल और क़यामत का आभास, जब उन्होंने गाया “यु हसरतो के दाग मोहब्बत में धो लिए”. फिर साथी कलाकार जयाजी ने गाया “तुझसे नाराज नहीं ज़िन्दगी, हैरान हूँ में”.

अर्चनाजी ने अगली ग़ज़ल और उनको पेश करनेवाले कलाकारका परिचय करते कहा “बिन सुरोंके गीत गाना चाहती हूँ, कशिश तेरी आज़माना चाहती हूँ” और उन्होंने सवाल किया “इश्क़ क्या है अरमान है या अहसान है”. ये सवाल प्रेक्षकों की सोच में रहा जब बे एरिया के प्यारे कलाकार, मनदीप सिंघ, जो रफ़ी साहेब के गाने खूबसूरती से पेश करते है, जब उन्होंने गाया, “अहसान तेरा होगा मुझपर”.

उर्मीजी और डिंपलभाई ने फिर दोहराया तलत अज़ीज़ का गाना, “फिर छेड़ी रात, बात फूलों की” और जयाजी ने गाया “क्यूँ ज़िन्दगी  की राह में मजबूर हो गए हम“. अर्चनाजी ने थोड़ी छेड़छाड़ करके सबको हँसा भी दिया.  जब डिंपलजी ने गाया “जुकी जुकी सी नज़र बेक़रार है”, तब अर्चनाजी ने पूछ लिया की गाना किसके लिए गाया जा रहा था.  जवाब तो नहीं मिला, लेकिन अर्चनाजी से ये शेर सुनके दिल खुश हो गया “एक ख़्वाब देदो हमें, वर्ना हम खो जायेंगे, इतना मत हसाओ, वर्ना हम रो जायेंगे।  यूँ भी आधा दीवाना कहती है दुनिया, पर पुरे पागल हम हो जायेंगे”. और इश्क़ की मस्ती के पागलपन से कौन अनजान है, ये सवाल सोच में रह गया जब उर्मीजी ने गाया “इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हजारों है”.

प्रेक्षकों से स्टैंडिंग ओवेशन मिला जब मनदीपजी ने गाया  “मेरे महबूब तुजे मेरी महोबत की कसम” गाना का भी जवाब नहीं और नाही कोई कसूर गानेवाले का. अर्चनाजी ने ग़ज़ल सुनाई “जब तू मुस्कायो तो दिल ये बाग़ बाग़ है”. डिम्पलजी और उर्मीजी को स्टैंडिंग ओवेशन मिला जब उन्होंने दोहराया ये खूबसूरत गीत “शमा जलाये रखना, जब तक के में न आऊं”. फिर जयाजी ने गाया “दर्द दिल में उठा” और मनदीपजी ने दिल को छू लिया ये खूबसूरत गाने के साथ “होठों से छूलो तुम”.

डिम्पलजी ने खूबसूरत ग़ज़ल सुनाई “कल चौदवीं की रात थी”. अर्चनाजी ने शेर सुनाया “में चंदा कम समझती हुँ, में सूरज कम समझती हूँ, में सितारे कम समजती हुँ. उधर उनकी मुसीबत इशारों में बात कर रहे है, इधर मेरी मुसीबत में इशारे कम समझती हूँ”.  कभी कभी इशारे में नहीं समझनेवालों का अंजाम जुदाई होता है?  उर्मीजी ने गायी ये ग़ज़ल “दिखाई दिए के बेखुद किया, हमें आपसे भी जुदा कर चले”. फिर हमने सुनी डिंपलभाई और उर्मीजी के आवाज़ में “दुनिया जिसे कहते है जादू का खिलौना है”.

DSC_1012_2शाम बेहतरीन रंगो से भर गयी थी, और डिम्पलजी ने ये खूबसूरत ग़ज़ल सुनाई “सरकती जाये रुख से नकाब, रंग ले रही है शाम आहिस्ता आहिस्ता”. अर्चनाजी  की कॉमेंट्री से भी खूब रंग जमा था.  अर्चनाजी ने सुनाया शेर “आपकी मुश्कराहटने हमारा होश उड़ा दिया, हम होश में आने ही वाले थे, की आप फिर मुस्करा दिए”. ये मुस्कराहट भी क्या चीज़ है, दिल की कसक बढ़ा देती है.  अगले गाने की ये कड़ी देखिये “मगर रोते रोते हँसी आ गयी है, खयालो में आके वोह जब मुस्कराये”. कहो कोनसा गाना है येह?

यह कड़ी है मंदीपजी ने फिर जो ग़ज़ल गायी उसमे से “वोह जब याद आये बहोत याद आये”. डिंपलजी ने फिर सुनाया यह गीत “चांदी जैसा दिल है तेरा” और फिर जयाजी और डिंपलजी ने गाया “किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है”. हम भी यह ग़ज़लों की शाम को याद करते रहेंगे और फिर आनेवाली एक और ग़ज़लों की रंगीन शाम का इंतज़ार करते रहेंगे.  दिल तो चाह रहा था की ये गीत और ग़ज़लों का सिलसिला चलता रहे, पर वख्त चेतावनी दे रहा था.  अर्चनाजी ने यह शेर सुनाया “सांसों की सीमा निश्चित है, इच्छाओं का अंत नहीं है और जिसकी कोई इच्छा नहीं ऐसा कोई संत नहीं है”. डिंपलजी और उर्मीजी की आवाज़ में आखरी गाना सुना “आज जाने की जिद न करो” और फिर जाना न चाहते हुए भी हम ग़ज़लों का प्यार दिल में लिए, गीतों की सोच दिमाग में लिए, और इतने प्रतिभासम्पन्न कलाकारों के प्रति आदर मन में लिए अपने घर की और निकल पड़े.

PS – My interview will air at Women’s Radio Network at 1 pm PST or 4 pm EST – If you are at or near your computer, please tune in at  www.wrnw1.com/listen-live/ today, Monday, July 21.

Often people believe that writing or journalism is my full time profession.  Professionally, I have two small businesses – My primary business is Recruitment for biotech, medical device & health IT companies and additionally, my other small business is offering Trainings in Diversity, Working Effectively in Global Environment & Team Building.  I welcome all connections with those looking for job opportunities; if you would like to connect with me on LinkedIn then feel free to send me an invite at wd_darshana at hotmail dot com.

I get complementary tickets at all bay area theater events and conferences and attend as press.  Besides writing about conferences, new technologies & concepts, I write about live theater reviews, book reviews and about events in English, Gujarati, & Hindi.  My writing is my labor of love & my contribution to promote live theater, arts, literature and poetry. Please tune in today at the link above. Many thanks!

 

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